जिस व्यवहार से सम्मान और प्रशंसा मिले, वह आकर्षक क्यों लगता है?


“दिल को छू जाए किसी की एक बात,
तो इंसान बदल देता है अपने हालात।”

पाली में लाखोटिया उद्यान जाने वाली सड़क पर सुबह का दृश्य बड़ा दिलचस्प होता है। कोई दौड़ रहा है, कोई योग कर रहा है और कोई तेज कदमों से पैदल चल रहा है। एक युवक रोज सुबह दौड़ने आता है। शुरुआत में वह केवल स्वास्थ्य के लिए दौड़ता था। लेकिन कुछ दिनों बाद उसके मित्र उसकी फिटनेस की तारीफ करने लगे, घरवालों ने उसके अनुशासन को सराहा और आसपास के लोगों ने कहा—“बहुत अच्छी आदत है, रोज सुबह दौड़ते हो।”

अब उसके लिए दौड़ना केवल व्यायाम नहीं रहा। उसके साथ सम्मान, प्रशंसा और सामाजिक स्वीकार्यता भी जुड़ गई।

यही मानव मन की एक गहरी प्रवृत्ति है—जिस व्यवहार से हमें अनुमोदन, सम्मान, प्रशंसा या स्वीकार्यता मिलने की संभावना होती है, वह व्यवहार हमें अधिक आकर्षक लगने लगता है।

इंसान को केवल पुरस्कार नहीं, स्वीकृति भी चाहिए

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। हम केवल पैसा या भौतिक सुविधाओं के लिए व्यवहार नहीं करते। हमारे लिए यह भी महत्वपूर्ण होता है कि दूसरे लोग हमें कैसे देखते हैं।

जब कोई हमारी मेहनत की तारीफ करता है, हमारे विचारों को महत्व देता है या हमारे व्यवहार को सम्मान देता है, तो हमारे अंदर सकारात्मक भाव पैदा हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति पहली बार जिम जाता है। अगले दिन उसका मित्र कहता है—

“तुम्हारे अंदर काफी बदलाव दिख रहा है।”

यह छोटी-सी प्रशंसा उस व्यक्ति को व्यायाम जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकती है।

विज्ञान इसे Positive Reinforcement से समझाता है

व्यवहारवादी मनोविज्ञान में B. F. Skinner के कार्यों ने यह समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया कि किसी व्यवहार के बाद मिलने वाला सकारात्मक परिणाम उस व्यवहार के दोहराए जाने की संभावना को बढ़ा सकता है।

इसे Positive Reinforcement यानी सकारात्मक पुनर्बलन कहा जाता है।

सरल सूत्र है—

व्यवहार → सकारात्मक प्रतिक्रिया → अच्छा अनुभव → व्यवहार दोहराने की संभावना बढ़ना।

एक महत्वपूर्ण Science Fact

मस्तिष्क में सामाजिक पुरस्कार केवल “अच्छा लगने” तक सीमित नहीं रहता। शोध से पता चलता है कि सामाजिक स्वीकृति और प्रशंसा brain reward system से जुड़ी प्रक्रियाओं को सक्रिय कर सकती है। विशेष रूप से ventral striatum जैसे मस्तिष्कीय क्षेत्रों की गतिविधि सामाजिक पुरस्कारों के अनुभव से जुड़ी पाई गई है।

यानी किसी व्यक्ति को सम्मान, प्रशंसा या सामाजिक स्वीकृति मिलने पर मस्तिष्क उस अनुभव को मूल्यवान मान सकता है। यही कारण है कि हम उन व्यवहारों को दोहराने के लिए प्रेरित हो सकते हैं जिनके बाद हमें सकारात्मक सामाजिक प्रतिक्रिया मिलती है।

प्रशंसा आदत को आकर्षक कैसे बनाती है?

मान लीजिए कोई व्यक्ति नियमित रूप से पढ़ता है। पढ़ने से उसे ज्ञान मिलता है, लेकिन जब शिक्षक या परिवार उसकी पढ़ाई की प्रशंसा करते हैं, तो पढ़ने के साथ सम्मान और उपलब्धि की भावना भी जुड़ जाती है।

अब किताब खोलना उसके लिए केवल पढ़ाई नहीं रहा।

यह ऐसा व्यवहार बन गया जिससे उसे अच्छा महसूस होता है।

यानी कई बार सामाजिक पुरस्कार किसी व्यवहार को भावनात्मक रूप से आकर्षक बना देता है।

यही सिद्धांत बुरी आदतों पर भी लागू होता है

अगर किसी मित्र समूह में किसी व्यक्ति के गलत व्यवहार पर उसे हँसी, तालियाँ या प्रशंसा मिलती है, तो वह व्यवहार भी मजबूत हो सकता है।

मान लीजिए कोई युवक दोस्तों के सामने खतरनाक तरीके से बाइक चलाता है। दोस्त तालियाँ बजाते हैं और कहते हैं—

“क्या शानदार स्टाइल है!”

उसे तत्काल सामाजिक पुरस्कार मिल गया। इससे उस व्यवहार को दोहराने की प्रेरणा बढ़ सकती है।

इसलिए हर प्रशंसा अच्छी आदत को मजबूत नहीं करती।

कभी-कभी गलत व्यवहार को मिलने वाली सामाजिक स्वीकृति भी उसे मजबूत कर देती है।

सामाजिक पहचान भी व्यवहार को आकर्षक बनाती है

मनुष्य केवल यह नहीं सोचता कि किसी व्यवहार से उसे क्या मिलेगा। वह यह भी सोचता है—

“इस व्यवहार से मैं कैसा व्यक्ति दिखाई दूँगा?”

अगर कोई व्यवहार हमें सम्मानित, बुद्धिमान, सफल या जिम्मेदार दिखाता है, तो वह व्यवहार हमारे लिए अधिक आकर्षक हो सकता है।

इसी कारण विज्ञापन और marketing में भी सामाजिक प्रभाव का इस्तेमाल किया जाता है। किसी उत्पाद को केवल उसकी उपयोगिता के आधार पर प्रस्तुत करने के बजाय उसे ऐसी पहचान से जोड़ा जाता है जिससे ग्राहक स्वयं को बेहतर या अधिक प्रतिष्ठित महसूस करे।

यानी कई बार हम केवल वस्तु नहीं खरीदते—हम उससे जुड़ी पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा भी खरीदना चाहते हैं।

दोहा

“जिस कर्म से मान मिले, मन उसको अपनाय,
जिस कर्म से अपमान हो, मन उससे दूरि जाय।”

इसलिए यदि किसी बच्चे की पढ़ाई, किसी व्यक्ति की मेहनत, किसी कर्मचारी की ईमानदारी या किसी खिलाड़ी के अनुशासन की सच्ची प्रशंसा की जाए, तो उस व्यवहार को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन प्रशंसा करते समय यह देखना भी जरूरी है कि हम किस व्यवहार को पुरस्कार दे रहे हैं।

क्योंकि हमारी एक छोटी-सी प्रतिक्रिया किसी दूसरे व्यक्ति के लिए अगली बार वही व्यवहार दोहराने का कारण बन सकती है।

“इक़रार की एक नज़र से दिल को सुकूँ मिल जाता है,
तारीफ़ का एक लफ़्ज़ भी इंसान बदल जाता है।”

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