“मंदिर, प्रार्थना और कर्म—माफी नहीं, परिवर्तन का मार्ग”
कर्म का सामान्य अर्थ है कार्य , क्रिया , या किया गया काम । भारतीय दर्शन, विशेषकर भगवद्गीता और अन्य ग्रंथों में, कर्म का अर्थ केवल कार्य करना नहीं, बल्कि यह भी है कि हर कर्म का एक परिणाम होता है। संक्षेप में: अच्छे कर्म → अच्छे परिणाम। बुरे कर्म → बुरे परिणाम। निष्काम कर्म → फल की इच्छा किए बिना अपना कर्तव्य करना। यही गीता का प्रमुख संदेश है। उदाहरण: किसी ज़रूरतमंद की सहायता करना — अच्छा कर्म। किसी को नुकसान पहुँचाना — बुरा कर्म। अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाना, बिना पुरस्कार की अपेक्षा के — निष्काम कर्म। “कर्म का अटल, अखंड और अटूट नियम” का अर्थ है: हर कर्म का परिणाम अवश्य मिलता है। कर्म का नियम न रुकता है, न टूटता है और न किसी के पक्ष में बदलता है। अटल — जो बदलता नहीं। अखंड — जो निरंतर चलता रहता है। अटूट — जिसे तोड़ा या समाप्त नहीं किया जा सकता। अर्थात, व्यक्ति के विचार, शब्द और कार्य किसी न किसी रूप में परिणाम उत्पन्न करते हैं। अच्छे कर्म सकारात्मक प्रभाव लाते हैं और गलत कर्मों के परिणाम भी समय के साथ सामने आ सकते हैं। “कर्म का नियम अटल है, समय उसका हिसाब रखता है और...