छोटी-छोटी आदतों का सिस्टम
बड़े बदलाव की शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से होती है हम अक्सर अपनी जिंदगी बदलने के लिए बहुत बड़े फैसले लेते हैं। सोमवार से रोज 2 घंटे व्यायाम करेंगे। अब रोज 4 घंटे पढ़ेंगे। आज से बिल्कुल खर्च नहीं करेंगे। अब हर दिन 50 पेज पढ़ेंगे। आज से पूरा जीवन बदल देंगे। लेकिन कुछ दिनों बाद वही उत्साह कम होने लगता है। व्यायाम छूट जाता है। पढ़ाई कम हो जाती है। किताब बंद हो जाती है। और हम सोचने लगते हैं— “मेरे अंदर discipline ही नहीं है।” लेकिन समस्या हमेशा discipline की कमी नहीं होती। कई बार समस्या यह होती है कि हमने अपने लिए बहुत बड़ा सिस्टम बना लिया। मानव व्यवहार में छोटे, स्पष्ट और आसानी से दोहराए जा सकने वाले व्यवहारों को लगातार करना अक्सर बड़े लेकिन अस्थिर प्रयासों से अधिक टिकाऊ होता है। यही है— छोटी-छोटी आदतों का सिस्टम। आदत क्या है और सिस्टम क्या है? एक आदत कोई एक व्यवहार हो सकती है। जैसे— रोज किताब पढ़ना। लेकिन जब उस आदत के साथ समय, स्थान, संकेत, नियम और समीक्षा की व्यवस्था जुड़ जाती है, तो वह एक सिस्टम बन सकती है। उदाहरण: आदत: रोज पढ़ना। सिस्टम: रात 9 बजे 20 मिनट पढ...