“दूसरों से नहीं, अपने बीते कल से तुलना करें”
जीवन में हर व्यक्ति आगे बढ़ना चाहता है। कोई अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाना चाहता है, कोई पढ़ाई में सफलता पाना चाहता है, कोई अपने व्यवसाय को बढ़ाना चाहता है, तो कोई अपने व्यवहार और व्यक्तित्व में सुधार करना चाहता है। हम लक्ष्य बनाते हैं, योजनाएँ तैयार करते हैं और मेहनत भी करते हैं। लेकिन कुछ समय बाद कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि वे वास्तव में आगे बढ़ रहे हैं या केवल व्यस्त बने हुए हैं। यही कारण है कि अपनी प्रगति को मापना बहुत आवश्यक है। प्रगति मापने का अर्थ केवल यह देखना नहीं है कि हमने कितना पैसा कमाया, कितनी बड़ी उपलब्धि प्राप्त की या कितनी जल्दी सफलता मिली। वास्तविक प्रगति यह भी है कि आज हमारा ज्ञान पहले से कितना बढ़ा है, हमारी आदतें कितनी बेहतर हुई हैं, हमारा आत्मविश्वास कितना मजबूत हुआ है और हम अपनी कमियों को सुधारने के लिए कितना प्रयास कर रहे हैं। अक्सर लोग अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं। वे देखते हैं कि कोई उनसे अधिक सफल है, किसी का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है या किसी ने उनसे जल्दी अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। ऐसी तुलना कई बार मन में निराशा, चिंता और हीन भावना पैदा करती ...