ऑटो सजेशन — दिमाग का अदृश्य मार्गदर्शक
एक बार अमेरिका के एक बड़े ऑनलाइन स्टोर में काम करने वाली टीम ने देखा कि ग्राहक जब वेबसाइट पर कोई शब्द लिखना शुरू करते हैं, तो स्क्रीन पर उससे पहले ही कुछ विकल्प दिखाई देने लगते हैं। ग्राहक अक्सर उन्हीं विकल्पों में से किसी एक को चुन लेते हैं। इसे देखकर एक महत्वपूर्ण बात समझ आती है— इंसान हमेशा पूरी तरह शून्य से निर्णय नहीं लेता; उसके सामने दिए गए संकेत उसके चुनाव को प्रभावित करते हैं। यही है Auto Suggestion —ऐसा सुझाव जो हमारे सामने विकल्प आने से पहले ही हमारे दिमाग को किसी दिशा में मोड़ देता है। आज मोबाइल में हम “मेडि…” लिखते हैं और फोन “medical” सुझा देता है। “How to…” लिखते ही कई संभावित वाक्य सामने आ जाते हैं। यह तकनीक हमारे पिछले व्यवहार और शब्दों के पैटर्न को देखकर अनुमान लगाती है। लेकिन यही सिद्धांत हमारे मानव मस्तिष्क में भी किसी हद तक काम करता है। हमारा दिमाग लगातार संकेतों, अनुभवों और पिछले व्यवहारों के आधार पर अगली प्रतिक्रिया का अनुमान लगाता रहता है। इसलिए यदि सुबह उठते ही आपका हाथ मोबाइल की तरफ जाता है, तो कई बार आपको सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती। दिमाग जैसे पहले से ...