टालमटोल का विज्ञान
मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, उसके भीतर बैठा है और उसका नाम है टालमटोल। हम सबने इसे महसूस किया है - कल से पढूंगा, सोमवार से जिम जाऊंगा, अगले महीने से बचत करूंगा। यह आलस नहीं है। कनाडा के मनोवैज्ञानिक पियर्स स्टील ने 800 से अधिक शोधों को मिलाकर बताया कि हम काम से नहीं भागते, हम उस काम से जुड़ी असहज भावना से भागते हैं। उन्होंने एक सूत्र दिया कि हमारी प्रेरणा इस बात पर टिकी है कि हमें फल कितना मूल्यवान लगता है और कितना दूर लगता है। जब फल दूर होता है और मन में आवेग ज्यादा होता है, तो हम टाल देते हैं। इसीलिए साल भर बाद होने वाली परीक्षा की तैयारी आज भारी लगती है। इसी बात को कार्लटन यूनिवर्सिटी के टिम पिचिल ने और गहराई से समझाया, वे बीस साल से इसी विषय पर काम कर रहे हैं। वे कहते हैं टालमटोल समय के प्रबंधन की समस्या नहीं, भावनाओं के प्रबंधन की समस्या है। जब कोई काम कठिन लगता है, तो हमारे मस्तिष्क का भावनात्मक केंद्र एमिगडाला उसे खतरे की तरह देखने लगता है। तब तर्क करने वाला हिस्सा प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स सुस्त पड़ जाता है और हम खुद को बचाने के लिए फोन उठा लेते हैं, चाय बनाने लगते हैं। नोब...