वास्तविकता का सिद्धांत (Reality Principle)
— सिग्मंड फ्रायड का मनोवैज्ञानिक सिद्धांत भूमिका मनुष्य का मन अनेक इच्छाओं, भावनाओं, कल्पनाओं और सपनों से भरा होता है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी सभी इच्छाएँ तुरंत पूरी हो जाएँ, लेकिन वास्तविक जीवन हमेशा हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता। जीवन में संसाधनों की सीमाएँ, सामाजिक नियम, नैतिक जिम्मेदारियाँ और परिस्थितियाँ हमारे निर्णयों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में यदि व्यक्ति केवल अपनी इच्छाओं के अनुसार कार्य करे, तो उसे अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी समस्या को समझाने के लिए प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने "वास्तविकता का सिद्धांत (Reality Principle)" प्रस्तुत किया। यह सिद्धांत बताता है कि मानसिक रूप से परिपक्व व्यक्ति अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करता है, वास्तविक परिस्थितियों का आकलन करता है और सही समय तथा सही तरीके से निर्णय लेता है। वास्तविकता का सिद्धांत क्या है? वास्तविकता का सिद्धांत (Reality Principle) वह मानसिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छाओं, भावनाओं और आवेगों को वास्तविक परिस्थितियों, सामाजिक नियमों और संभावित परिणाम...