अभ्यास: डर को हराने का सबसे शक्तिशाली तरीका
David Bayles और Ted Orland की प्रसिद्ध पुस्तक Art & Fear में एक बेहद प्रभावशाली उदाहरण मिलता है। एक मिट्टी के बर्तन बनाने की कक्षा में विद्यार्थियों को दो समूहों में बाँट दिया गया। पहले समूह से कहा गया— “आपको केवल एक बर्तन बनाना है, लेकिन वह बर्तन जितना संभव हो उतना उत्कृष्ट होना चाहिए।” दूसरे समूह से कहा गया— “आपको गुणवत्ता की चिंता नहीं करनी है। बस जितने अधिक बर्तन बना सकते हैं, बनाते जाइए।” पहले समूह के विद्यार्थी अपने एक बर्तन को बेहतर से बेहतर बनाने के बारे में सोचते रहे। वे आकार, डिजाइन और पूर्णता पर ध्यान देते रहे। दूसरे समूह ने बर्तन बनाना शुरू कर दिया। एक बर्तन बना—खराब हुआ। दूसरा बनाया—उसमें कमी रह गई। तीसरा बनाया—कुछ सुधार हुआ। चौथा बनाया—तकनीक थोड़ी बेहतर हुई। वे लगातार बनाते रहे। जब अंत में दोनों समूहों के काम को देखा गया तो आश्चर्यजनक रूप से सबसे अच्छे बर्तन दूसरे समूह के थे—उन लोगों के, जिन्होंने सबसे ज्यादा बर्तन बनाए थे। यहीं से Art & Fear हमें जिंदगी का एक गहरा सत्य समझाती है— पूर्णता के बारे में सोचते रहने से पूर्णता नहीं आती; काम करते रहने से ...