"भटकाव से बुलंदी तक: आम आदमी से खास इंसान बनने का सफर"
भटकते हुए आदमी से खास आदमी तक "हर महान व्यक्ति कभी न कभी एक साधारण और भटका हुआ इंसान था। अंतर केवल इतना था कि उसने एक दिन अपने जीवन की दिशा बदलने का निर्णय लिया।" शुरुआत कल्पना कीजिए कि एक यात्री घने जंगल में रास्ता भूल गया है। वह तेज़-तेज़ चलता है, लेकिन हर कुछ देर बाद वहीं पहुँच जाता है जहाँ से चला था। उसकी समस्या चलने की नहीं, दिशा की है। मनुष्य का जीवन भी ऐसा ही है। बहुत से लोग दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन वर्षों बाद भी वहीं खड़े रहते हैं। कारण यह नहीं कि उनमें क्षमता की कमी है, बल्कि इसलिए कि उनका जीवन बिना स्पष्ट दिशा के चल रहा होता है। भटकाव कोई बीमारी नहीं है। यह केवल एक संकेत है कि अब समय आ गया है अपने जीवन का नक्शा बदलने का। भटकाव क्यों होता है? भटकाव तब पैदा होता है जब इंसान अपने जीवन की बागडोर दूसरों के हाथों में दे देता है। कभी समाज की राय, कभी दोस्तों की सलाह, कभी डर, कभी आलस्य और कभी असफलता उसके फैसले तय करने लगते हैं। धीरे-धीरे वह अपने सपनों से दूर और दूसरों की अपेक्षाओं के करीब पहुँच जाता है। खास आदमी कौन होता है? खास आदमी वह नहीं जिसके पास सबसे अध...