आत्मविश्वास तैयारी का फल है
एक समय की बात है। जापान में एक युवा तलवारबाज़ अपने गुरु के पास पहुँचा। उसके मन में एक ही सवाल था—“गुरुजी, युद्ध के समय डर कैसे खत्म किया जाए?” गुरु उसे किसी युद्धभूमि में नहीं ले गए। उन्होंने उसे एक शांत कमरे में बैठाया और सामने रखी तलवार की ओर देखने को कहा। कई दिनों तक कोई युद्ध नहीं हुआ। कोई मुकाबला नहीं हुआ। बस अभ्यास हुआ—खड़े होने का, तलवार पकड़ने का, कदम रखने का, वार करने का और सही समय पर रुक जाने का। कुछ सप्ताह बाद गुरु ने अचानक उसे चुनौती दी। युवक के हाथ काँपे नहीं। गुरु मुस्कुराए और बोले— “आज तुम्हारा आत्मविश्वास पैदा नहीं हुआ है। आज केवल वह दिखाई दे रहा है, जो तुमने इतने दिनों से भीतर बनाया है।” यही आत्मविश्वास का रहस्य है। Confidence is the fruit of preparation. आत्मविश्वास कोई ऐसी चीज नहीं जिसे सुबह उठकर अपने मन से कहा जाए—“आज से मैं confident हूँ।” कुछ समय के लिए ऐसा करने से उत्साह जरूर आ सकता है, लेकिन गहरा आत्मविश्वास तब बनता है जब दिमाग के पास अपने विश्वास के पीछे प्रमाण होते हैं। जब कोई विद्यार्थी परीक्षा से पहले किताब खोलकर बैठता है, तो उसके सामने दो रास्ते ...