"मन का छिपा हुआ नियम: सुरक्षा और परिचितता अक्सर तर्क पर भारी पड़ जाती हैं।"
Safety and familiarity often override logic. "सुरक्षा और परिचितता (आदत) अक्सर तर्क (लॉजिक) पर भारी पड़ जाती हैं।" मनुष्य का मस्तिष्क केवल तर्क से निर्णय नहीं लेता। उसका पहला उद्देश्य सुरक्षित महसूस करना होता है। इसलिए हमारा दिमाग अक्सर उस चीज़ को चुनता है जो परिचित (familiar) हो, भले ही वह सबसे अच्छा विकल्प न हो। उदाहरण: कोई व्यक्ति वर्षों से एक ऐसी नौकरी में है जहाँ वह खुश नहीं है, फिर भी नई नौकरी लेने से डरता है क्योंकि पुरानी नौकरी उसे परिचित और सुरक्षित लगती है। कोई व्यक्ति एक विषाक्त (toxic) रिश्ते में बना रहता है क्योंकि वह रिश्ता उसके लिए परिचित है, जबकि उसे छोड़ना तर्कसंगत रूप से बेहतर हो सकता है। मनोवैज्ञानिक तथ्य: मस्तिष्क अनिश्चितता (uncertainty) को संभावित खतरे की तरह देखता है। परिचित चीज़ों से दिमाग को कम ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इसलिए लोग अक्सर "जो जानते हैं" उसे चुनते हैं, न कि "जो बेहतर है"। > "मन हमेशा सही को नहीं, बल्कि सुरक्षित और परिचित को चुनने की कोशिश करता है।" प्रेरक संदेश: "विकास (Growth) हमेशा परिचितता के दायरे ...