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100 Subconscious Mind Facts (अवचेतन मन के 100 तथ्य)

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🧠 N@REN DIARIES 100 Subconscious Mind Facts (अवचेतन मन के 100 तथ्य) आपका अवचेतन मन आपकी आदतों को प्रभावित करता है। बार-बार दोहराए गए विचार मजबूत होते जाते हैं। सकारात्मक सोच बेहतर आदतें बनाने में मदद कर सकती है। नकारात्मक सोच तनाव बढ़ा सकती है। आपका मस्तिष्क लगातार सीखता रहता है। अच्छी आदतें छोटे कदमों से शुरू होती हैं। ध्यान (Meditation) मन को शांत करने में सहायक हो सकता है। अच्छी नींद याददाश्त के लिए महत्वपूर्ण है। आपका वातावरण आपकी सोच को प्रभावित करता है। आत्मविश्वास अभ्यास से बढ़ता है। हर दिन कुछ नया सीखना मस्तिष्क के लिए लाभदायक है। भावनाएँ निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। कृतज्ञता का अभ्यास मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो सकता है। लक्ष्य लिखने से उन पर ध्यान बना रहता है। नियमित अभ्यास से कौशल बेहतर होते हैं। धैर्य सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी है। असफलता सीखने का अवसर है। सकारात्मक आत्म-संवाद लाभदायक हो सकता है। आपका ध्यान आपकी उत्पादकता बढ़ाता है। तनाव कम करने के लिए गहरी साँस लेना मददगार हो सकता है। हर आदत दोहराव से बनती है। छोटे बदलाव बड़े प...

हर पल का आनंद (जीने का सही तरीका)

वर्तमान में जीने की कला का अर्थ है अपने जीवन को वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीना और उसका आनंद लेना, न कि अतीत में उलझना या भविष्य की चिंता करना। यह कलाMindfulness (माइंडफुलनेस) या सचेतनता के माध्यम से सीखी जा सकती है। वर्तमान में जीना सीखने के लिए, अपने आसपास की बातों पर ध्यान दें, अपनी भावनाओं और शारीरिक संवेदनाओं के प्रति जागरूक रहें, माइंडफुलनेस और ध्यान का अभ्यास करें, एक समय में एक ही काम पर ध्यान दें, और भविष्य की चिंता व अतीत के पछतावे से बचें. आप अपनी शारीरिक गतिविधियों का उपयोग भी वर्तमान में जीने के लिए कर सकते हैं, जैसे टहलते समय अपने आस-पास के वातावरण को महसूस करना या योग करते समय अपने शरीर की मांसपेशियों की गति पर ध्यान देना । वर्तमान में जीने का अर्थ है अपने वर्तमान क्षण में सक्रिय रूप से संलग्न रहना। अपने जीवन को सचेतन रूप से जीना और अपनी सांसों के प्रत्येक क्षण पर विश्वास करना एक वरदान है। यह व्यक्ति को जीवन का पूर्ण अनुभव करने में सक्षम बनाता है। यह व्यक्ति को अधिक आनंद, प्रसन्नता और कृतज्ञता का अनुभव कराता है। वर्तमान में रहने से न केवल आपका ध्यान केंद्रित होता है, ब...

प्रार्थना

प्रार्थना का अर्थ है  ईश्वर, देवताओं या किसी पवित्र शक्ति से संवाद करने, विनती करने या अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की एक क्रिया है, जो व्यक्तिगत या सामूहिक, मौखिक या मौन हो सकती है । प्रार्थना का अर्थ है ईश्वर के सामने अपने हृदय की बात कहना, सर्वशक्तिमान को अपने सुख-दुख बताना। इस ब्रह्मांड में सभी के लिए प्रार्थना करना महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को ईश्वर के करीब लाती है और हमारे जीवन में बदलाव लाने में एक शक्तिशाली शक्ति साबित हो सकती है। प्रार्थना अवचेतन मन की शक्ति को सक्रिय करने का एक शक्तिशाली माध्यम है, जो हमें हमारे जीवन को बेहतर बनाने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। प्रार्थना करने का अर्थ है अपने विचारों को एकसार करना और अपने इरादों पर ध्यान केंद्रित करना। प्रार्थना व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में आराम और तनाव से निपटने के लिए एक सुरक्षात्मक तंत्र प्रदान करके एक सुरक्षात्मक कारक के रूप में कार्य कर सकती है। प्रार्थना करने से मन को शांति, सांत्वना और शक्ति मिलती है, व्यक्ति को परमेश्वर से जुड़ने और उसके मार्गदर्शन को प्राप्त करने में मदद मिलती है, साथ ही यह ...

निंदा का फल

एक बार की बात है.. किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी । ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए। राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा। राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके। रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा कि क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है, ताकि उसके घर रात काटी जा सके? चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब पूजा करते हैं। राजा उनके घर रात में ठहर गया। सुबह जब राजा उठा तो लड़की पूजा पर बैठी हुई थी । इससे पहले लड़की का रूटीन था कि वह दिन निकलने से पहले ही पूजा से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी। लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक पूजा पर बैठी रही। जब लड़की उठी तो उसके भाई ने कहा कि बहन तू इतनी देर से उठी है ।अपने घर मुसाफिर आया हुआ है और उसे नाश्ता करके दूर जाना है। लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर ...

हम एक निमित्त मात्र

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हम केवल निमित्त मात्र है इससे ज्यादा और कुछ नही बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा जरूर पढे !  कोई भी छोटा बड़ा काम करो तो तुम ये कभी मत समझना की ये मैं कर रहा हुं या उसे अपने नाम से कभी मत रखना! एक धार्मिक स्थान पर एक सेठ जी भंडारा करते थे एक बार एक संत श्री वहाँ प्रसाद ग्रहण करने आये तो उन्होने देखा की सेठजी के मन मे अहंकार का उदय हो रहा है तो उन्होने कहा सेठजी बिना उसकी कृपा के हम कुछ भी नही कर सकते, उसकी कृपा न हो तो खिलाना तो बहुत दूर की बात सामने परोसी हुई थाली अरे थाली क्या हाथ मे लिया ग्रास भी हाथ मे रह जाता है। सेठजी आप यही सोचना की दाने दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम अरे ये तो उसकी महानता है जो कर तो वो रहा है और नाम हमें दे रहा है! सेठजी जो काम राम जी को करना है वो तो वो करेंगे आप तो ये समझना की उन्होने इस धर्म कर्म के लिये मुझे चुना है यही मेरा परम सौभाग्य है! सन्त श्री तो कहकर चले गये पर सेठजी को ये हज़म नही हुआ कि दाने दाने पर भी भला खाने वाले का नाम लिखा होता है क्या? सेठ जी को भूख लग रही थी वो भण्डार कक्ष मे गये एक थाली मे भोजन लिया और मन मे सोचने लगे कि इस भोजन पर मेरा न...

अंतरात्मा की आवाज

बहुत समय पूर्व जब गुरुकुल शिक्षा की प्रणाली होती थी | तब हर बालक को अपने जीवन के पच्चीस वर्ष गुरुकुल में बिताना पड़ता था | उस समय एक प्रचंड पंडित राधे गुप्त हुआ करते थे। बात उन दिनों की हैं जब राधे गुप्त की उम्र ढलने लगी थी और उसकी पत्नी का देहांत हो चूका था | घर में विवाह योग्य एक कन्या थी |  वह उसका विवाह एक योग्य व्यक्ति से करना चाहते थे जिसके पास सम्पति भले ना हो पर वह कर्मठ हो जो किन्ही भी परिस्थिती में उसकी बेटी को खुश रखे और उचित समय पर उचित निर्णय ले सके | एक दिन उनके मस्तिष्क में एक ख्याल आया  कि क्यूँ ना वो अपने खुद के शिष्यों में से ही योग्य वर की तलाश करे|  राधे गुप्त ने सभी शिष्यों से कहा कि वे एक परीक्षा आयोजित करना चाहते हैं जिसमे सभी की बुद्धिमानी का परिचय होगा | उन्होंने सभी से कहा कि उन्हें अपनी पुत्री के विवाह के लिये पर्याप्त धन एकत्रित करना हैं, इसलिये वे चाहते हैं कि उनके शिष्य विवाह में लगने वाली सभी सामग्री कैसे भी करके एकत्र करे, भले उसके लिये उन्हें चौरी का रास्ता भी चुनना पड़े लेकिन उन्हें चौरी करता कोई भी देख ना सके इसी एक शर्त का पालन सभी को करन...

असली-स्वर्ग

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गोपाल बहुत आलसी व्यक्ति था। घरवाले भी उसकी इस आदत से परेशान थे। वह हमेशा से ही चाहता था कि उसे एक ऐसा जीवन मिले, जिसमें वह दिनभर सोए और जो चीज चाहे उसे शय्या में ही प्राप्त हो जाए। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। एक दिन उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद वह स्वर्ग में पहुंच गया, जो उसकी कल्पना से भी सुंदर था। गोपाल सोचने लगा काश! मैं इस सुंदर स्थान पर पहले आ गया होता। बेकार में धरती पर रहकर काम करना पड़ता था। खैर, अब मैं आराम का जीबन जिऊंगा वह यह सब सोच ही रहा था कि एक देवदूत उसके पास आया और हीरे-जवाहरात जड़े शय्या की ओर संकेत करते हुए बोला- आप इस पर विश्राम करें। आपको जो कुछ भी चाहिए होगा, शय्या पर ही मिल जाएगा। यह सुनकर गोपाल बहुत प्रसन्न हुआ। अब वह दिन-रात खूब सोता। उसे जो चाहिए होता, शय्या पर मंगवा लेता। कुछ दिन इसी तरह चलता रहा। लेकिन अब वह उकताने लगा था। उसे न दिन में चैन था न रात में नींद। जैसे ही वह बिस्तर से उठने लगता दास-दासी उसे रोक देते। इस तरह कई महीने बीत गए। गोपाल को विश्राम का जीवन बोझ लगने लगा। स्वर्ग उसे बेचैन करने लगा था। वह कुछ काम करके अपना दिन बिताना चाहता था। एक दिन वह देव...