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Showing posts from June, 2019

*आइसक्रीम*

*आइसक्रीम* अरे वाह पापा आज बहुत गर्मी थी अच्छा है आप आइस क्रीम ले आये 7 साल के बेटे ने अपने पापा के हाथों से आइस क्रीम का कप लेते हुए ख़ुशी व्यक्त की ... अरे मेरा राजा बेटा ये लो मम्मी को भी देकर आओ ये कुल्फी उन्हें बहुत पसंद है और दादी की कुल्फी कहां है पापा ? बेटे ने थैला खोलते हुए कहा ... अरे बेटा तुम्हारी दादी के मुँह में दांत ही कहाँ बचे है जो इस उम्र में उन्हें कुल्फी का क्या स्वाद आएगा .. पर पापा कल दादी बता रही थी कि जब आप 6 महीने के थे तभी से वो आपको गर्मियों में आइस क्रीम जरूर खिलाती थी क्योंकि आपको बहुत पसंद थी आप आइस क्रीम के लिए खूब रोते थे पर पापा उस समय आपके भी तो मुँह में दांत नही होंगे फिर आपको भी तो आइस क्रीम का क्या स्वाद आता होगा ? बेटे की बात सुनकर पिता के हाथ में पकड़ी हुई कुल्फी पिघल कर ज़मीन पर आ गिरी और दरवाजे के पीछे खड़ी दादी अपने पोते की बातें सुनकर आइस क्रीम सी ठंडी हो गयी । *अन्तिमा सिंह* *मौलिक स्वरचित* ऐसी लघु कथाएं, कहानियां और कविताएं पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ! अपने विचार अवश्य रखें ! और शेयर करना न भूले 🙏🏻 👇 https://ch...

असली मर्द

असली मर्द पति को यूँ उदास देख नेहा से रहा नहीं गया उसके पास आकर बैठ गई और बोली-"क्या हुआ अमित?तबियत तो ठीक है?सुबह से कुछ ढंग से खाया भी नहीं और ऑफिस भी नहीं गए" "वो बस आज मन नहीं किया जाने का और कोई खास बात नहीं"अमित बात को टालते हुए बोला "जहाँ तक मैं जानती हूँ,तुम बेवजह कभी छुट्टी नहीं लेते जरूर कोई बात है।तुम्हें मेरी कसम है,बताओ क्या हुआ है?" नेहा का इतना बोलना ही था,कि अमित टूट गया और बच्चों की तरह बिलख- बिलखकर रोने लगा "ऐसा क्या हुआ अमित?"नेहा रुआंसी होकर बोली "नेहा,कल मेरी मेडिकल रिपोर्ट मिल गई थी।उसमें साफ लिखा है,कि मैं तुम्हे बच्चा नहीं दे सकता।अब तो मुझे अपने को मर्द कहने में भी शर्म आ रही है" "बस इतनी सी बात थी।ये कमी तो मुझमें भी हो सकती थी।जहाँ तक बात मर्द होने की है,तो बच्चा पैदा करने की ताकत से ही कोई मर्द नहीं होता। असली मर्द वो होता है,जो अपनी औरत को प्यार करे,उसकी हर छोटी बड़ी जरूरत को पूरा करे,सुख दुख में उसका ध्यान रखे और उसका सम्मान करे" "अमित तुम सिर्फ अच्छे पति ही नहीं अच्छे इंसान भी हो मेरे लिए...

इनाम

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इन बीस सालों में ये पचासवाँ घर है जिसे बनाने में उसका खून पसीना लगा है। इस ईमानदारी के खून पसीने से दो वक़्त की रोटी तो कमा पाता है पर अपने लिए एक घर ना बना सका।  इस बीच जगह बदला उसके मालिक बदलें पर इस मजदूर की किस्मत नहीं। दस बाइ दस के कमरे में इसका परिवार रहता है और इन्हीं चारदीवारी में उनके सपने फड़फड़ाते हैं। बच्चों के सपनें जो उनके उम्र के साथ ही बड़े हो रहे हैं और बीवी के कई सपनों ने आत्महत्या कर ली और कई सपने हैं जो पनपते तो हैं पर तंगहाली उसका गला घोंट देती है। ये हर दिन अपने खून पसीने के साथ अपने सपनों को भी बेचता है ताकि अपने बीवी बच्चों के सपने खरीद सके। पर गरीबों के सपने बिकते बहुत सस्ते हैं। इतने में तो जिंदगी सिर्फ हकीकत दिखाती है।  आज एक हकीकत इसके सामने आया और अपने मालिक से बगावत कर बैठा "साहब! ई गलत है, अइसन सीमेन्ट अउर सरिया सात मंजिला घर में नाही चली..ऐसा हम नाही होने देंगे"  "बड़ा आया इंजीनियर की औलाद.. अभी निकाल बाहर करूँगा काम से..चल भाग"  "साहेब घर में परिवार रहेंगे, बच्चे रहेंगे, कल कोई दुर्घटना हो जाई तो हम अपना के कभी माफ नाही कर सकत हैं...