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Showing posts from March, 2025

असली-स्वर्ग

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गोपाल बहुत आलसी व्यक्ति था। घरवाले भी उसकी इस आदत से परेशान थे। वह हमेशा से ही चाहता था कि उसे एक ऐसा जीवन मिले, जिसमें वह दिनभर सोए और जो चीज चाहे उसे शय्या में ही प्राप्त हो जाए। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। एक दिन उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद वह स्वर्ग में पहुंच गया, जो उसकी कल्पना से भी सुंदर था। गोपाल सोचने लगा काश! मैं इस सुंदर स्थान पर पहले आ गया होता। बेकार में धरती पर रहकर काम करना पड़ता था। खैर, अब मैं आराम का जीबन जिऊंगा वह यह सब सोच ही रहा था कि एक देवदूत उसके पास आया और हीरे-जवाहरात जड़े शय्या की ओर संकेत करते हुए बोला- आप इस पर विश्राम करें। आपको जो कुछ भी चाहिए होगा, शय्या पर ही मिल जाएगा। यह सुनकर गोपाल बहुत प्रसन्न हुआ। अब वह दिन-रात खूब सोता। उसे जो चाहिए होता, शय्या पर मंगवा लेता। कुछ दिन इसी तरह चलता रहा। लेकिन अब वह उकताने लगा था। उसे न दिन में चैन था न रात में नींद। जैसे ही वह बिस्तर से उठने लगता दास-दासी उसे रोक देते। इस तरह कई महीने बीत गए। गोपाल को विश्राम का जीवन बोझ लगने लगा। स्वर्ग उसे बेचैन करने लगा था। वह कुछ काम करके अपना दिन बिताना चाहता था। एक दिन वह देव...

तीन प्रश्न

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एक बार एक राजा बड़ा प्रसन्न मुद्रा में था सो अपने वज़ीर के पास गया और कहा कि   तुम्हें मेरे तीन सवालों के जवाब पेश करना हैं।     यदि तुम कामयाब हो जाओगे तो मेरी आधी संपति तुम्हारी हो जायेगी और यदि तुम मेरे तीन सवालों के जवाब तीस दिन के भीतर न दे पाये तो मेरे सिपाही तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर देंगे।  वज़ीर परेशान हो गया। राजा ने कहा मेरे तीन सवाल लिख लो, वज़ीर ने लिखना शुरु किया। राजा ने कहा....     1) इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई क्या हैं?     2) इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा क्या हैं?     3) इंसान की जिंदगी की सबसे बड़ी कमजोरी क्या हैं?     राजा ने तीनों सवाल समाप्त करके कहा तुम्हारा समय अब शुरु होता हैं। वज़ीर अपने तीन सवालों वाला कागज लेकर दरबार से रवाना हुआ और सभी संतो - महात्माओं, साधु-फक़ीरों के पास जाकर उन सवालों के जवाब पूछने लगा। मगर किसी के पास भी जवाबों से वह संतुष्ट न हुआ। धीरे-धीरे दिन गुजरते हुए जा रहे थे।     अब उसके दिन-रात उन तीन सवालों को लिए हुए गुजरते जा रहे थे।  अं...

सलाह

एक व्यक्ति ने अगरबत्ती की दुकान खोली ! नाना प्रकार की अगरबत्तियां थीं ! उसने दुकान के बाहर एक साइन बोर्ड लगाया -  "यहाँ सुगन्धित अगरबत्तियां मिलती हैं ! " दुकान चल निकली ! एक दिन एक ग्राहक उसके दुकान पर आया और कहा - आपने जो बोर्ड लगा रखा है , उसमें एक विरोधाभास है ! भला अगरबत्ती सुगंधित नहीं होंगी तो क्या दुर्गन्धित होंगी ?  उसकी बात को उचित मानते हुए विक्रेता ने बोर्ड से सुगंधित शब्द मिटा दिया ! अब बोर्ड इस प्रकार था -  "यहाँ अगरबत्तियां मिलती हैं ! " इसके कुछ दिनों के पश्चात किसी दूसरे सज्जन ने उससे कहा - आपके बोर्ड पर "यहाँ " क्यों लिखा है ? दुकान जब यहीं है तब यहाँ लिखना निरर्थक है !  इस बात को भी अंगीकार कर विक्रेता ने बोर्ड पर यहाँ शब्द मिटा दिया ! अब बोर्ड था -  अगरबत्तियां मिलती हैं ! पुनः उस व्यक्ति को एक रोचक परामर्श मिला - अगरबत्तियां मिलती हैं का क्या प्रयोजन ? अगरबत्ती लिखना ही पर्याप्त है ! अतः वह बोर्ड केवल एक शब्द के साथ रह गया - "अगरबत्ती " विडम्बना देखिये ! एक शिक्षक ग्राहक बन कर आये और अपना ज्ञान वमन किया - दुकान जब मात्र अगरबत...

रत्ती भर भी परवाह नहीं

"रत्ती" यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है। जैसे - रत्ती भर भी परवाह नहीं, रत्ती भर भी शर्म नहीं, रत्ती भर भी अक्ल नहीं...!! आपने भी इस शब्द को बोला होगा, बहुत लोगों से सुना भी होगा। आज जानते हैं 'रत्ती' की वास्तविकता, यह आम बोलचाल में आया कैसे? आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रत्ती एक प्रकार का पौधा होता है, जो प्रायः पहाड़ों पर पाया जाता है। इसके मटर जैसी फली में लाल-काले रंग के दाने (बीज) होते हैं, जिन्हें रत्ती कहा जाता है। प्राचीन काल में जब मापने का कोई सही पैमाना नहीं था तब सोना, जेवरात का वजन मापने के लिए इसी रत्ती के दाने का इस्तेमाल किया जाता था। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस फली की आयु कितनी भी क्यों न हो, लेकिन इसके अंदर स्थापित बीजों का वजन एक समान ही 121.5 मिलीग्राम (एक ग्राम का लगभग 8वां भाग) होता है। तात्पर्य यह कि वजन में जरा सा एवं एक समान होने के विशिष्ट गुण की वजह से, कुछ मापने के लिए जैसे रत्ती प्रयोग में लाते हैं। उसी तरह किसी के जरा सा गुण, स्वभाव, कर्म मापने का एक स्थापित पैमाना बन गया यह "रत्ती" शब्द। रत्ती भर मतलब जरा सा ।  अक्...

अच्छी सेहत का रहस्य

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में शंकर नाम का एक वृद्ध व्यक्ति रहता था। उसकी उम्र अस्सी साल से भी ऊपर थी पर वो चालीस साल के व्यक्ति से भी स्वस्थ लगता था। लोग बार बार उससे उसकी सेहत का रहस्य जानना चाहते पर वो कभी कुछ नहीं बोलता था । एक दिन राजा को भी उसके बारे में पता चला और वो भी उसकी सेहत का रहस्य जाने के लिए उत्सुक हो गए। राजा ने अपने गुप्तचरों से शंकर पर नज़र रखने को कहा। गुप्तचर भेष बदल कर उस पर नज़र रखने लगे। अगले दिन उन्होंने देखा की शंकर भोर में उठ कर कहीं जा रहा है , वे भी उसके पीछे लग गए। शंकर तेजी से चलता चला जा रहा था , मीलों चलने के बाद वो एक पहाड़ी पर चढ़ने लगा और अचानक ही गुप्तचरों की नज़रों से गायब हो गया। गुप्तचर वहीँ रुक उसका इंतज़ार करने लगे। कुछ देर बाद वो लौटा , उसने मुट्ठी में कुछ छोटे-छोटे फल पकड़ रखे थे और उन्हें खाता हुआ चला जा रहा था। गुप्तचरों ने अंदाज़ा लगाया कि हो न हो , शंकर इन्ही रहस्यमयी फलों को खाकर इतना स्वस्थ है। अगले दिन दरबार में उन्होंने राजा को सारा किस्सा कह सुनाया। राजा ने उस पहाड़ी पर जाकर उन फलों का पता लगाने का आदेश दिया , पर बहुत खोज-बीन करने के...

आप हाथी नहीं इंसान हैं

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एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!!! ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे. उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ? तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.” आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!! इन हाथियों की तरह ही ह...

अंतिम बलिदान

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बीस साल पहले हिमाचल प्रदेश के एक गांव से एक पत्र रक्षा मंत्रालय के पास पहुंचा।  लेखक एक स्कूल शिक्षक थे और उनका अनुरोध इस प्रकार था।  उन्होंने पूछा, "यदि संभव हो तो, क्या मुझे और मेरी पत्नी को उस स्थान को देखने की अनुमति दी जा सकती है जहां कारगिल युद्ध में हमारे इकलौते पुत्र की मृत्यु हुई थी।  उनकी स्मृति दिवस,  07/07/2000 है।  यदि आप नहीं कर सकते हैं तो कोई बात नहीं, यदि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध है, तो इस स्थिति में मैं अपना आवेदन वापस ले लूँगा।"  पत्र पढ़ने वाले विभाग के अधिकारी ने कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके दौरे की लागत क्या है, मैं इसे अपने वेतन से भुगतान करूंगा, अगर विभाग तैयार नहीं है तो भी मैं शिक्षक और उनकी पत्नी को उस स्थान पर लाऊंगा जहां  उनका इकलौता लड़का मर गया" और उसने एक आदेश जारी किया।  मृतक नायक के स्मरण दिवस पर, बुजुर्ग दंपत्ति को सम्मान के साथ स्थल पर लाया गया।  जब उन्हें उस स्थान पर ले जाया गया जहाँ उनके पुत्र की मृत्यु हुई, तो ड्यूटी पर मौजूद सभी लोगों ने खड़े होकर सलामी दी।  लेकिन एक सिपाही ने उन्ह...

अपने-अपने चश्मे

दृश्य 1:  एक सरकारी अस्पताल अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में हंगामा मचा था। एक गंभीर स्थिति में लाए गए मरीज की हालत नाजुक थी। उसके परिजन बुरी तरह घबराए हुए थे। डॉक्टर को बार-बार फोन किया गया, और आखिरकार वह अस्पताल पहुँचा। डॉक्टर के आते ही मरीज के रिश्तेदार गुस्से से फट पड़े— "इतनी देर क्यों लगा दी डॉक्टर साहब? हम कब से आपको बुला रहे थे!" "अगर कुछ हो जाता तो? क्या आपकी ज़िम्मेदारी नहीं बनती?" "दूसरे का बेटा है, इसलिए आपको कोई फर्क नहीं पड़ता!" डॉक्टर ने गहरी साँस ली और शांत स्वर में कहा, "*मुझे अपना काम करने दें। बहस में समय बर्बाद न करें*।" लेकिन परिजनों की शिकायतें जारी रहीं। डॉक्टर ने बिना कुछ कहे अपने कपड़े बदले, ऑपरेशन थियेटर में गया और दो घंटे के कठिन ऑपरेशन के बाद बाहर आया। उसने असिस्टेंट डॉक्टर को ज़रूरी निर्देश दिए और परिवार को आश्वस्त किया, "मरीज अब खतरे से बाहर है।" इतना कहकर वह बिना एक पल रुके अस्पताल से बाहर चला गया। मरीज के रिश्तेदारों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ। "देखा? कैसा अहंकारी डॉक्टर है! दो मिनट रुककर हमसे बात तक...

हार मत मानो

एक समय की बात है, प्रतापगढ़ के राजा की कोई संतान नहीं थी. लेकिन राज्य को आगे बढ़ाने के लिए एक उत्तराधिकारी की जरूरत थी. इसलिए राजा ने एक फैसला किया कि वह अपने ही राज्य से किसी एक बच्चे को चुनेगा जो उसका उत्तराधिकारी बनेगा…. इस इरादे से राजा ने अपने राज्य के सभी बच्चों को बुलाकर यह घोषणा की कि वह इन बच्चों में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी चुनेगा… उसके बाद राजा ने उन बच्चो को एक एक थैली बंटवा दी और कहा….. कि आप सब  लोगो को जो थैली दी गई है उसमे अलग-अलग फूलों का बीज हैं.. हर बच्चे को सिर्फ एक एक बीज ही दिया गया है… आपको इसे अपने घर ले जाकर एक गमले में लगाना है… और 6 महीने बाद हम फिर इस आप सब के इस गमले के साथ यहीं इकठ्ठा होंगे और उस समय मैं फैसला करूँगा की कौन इस राज्य का उत्तराधिकारी बनेगा… उन लडकों में एक ध्रुव नाम का लड़का था, बाकी बच्चो की तरह वो भी बीज लेकर ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर वापस आ गया… उसी दिन घर जाकर उसने एक गमले में उस बीज को लगा दिया और उसकी अच्छे से देखभाल की… दिन बीतने लगे, लेकिन कई हफ्ते बाद भी गमले में पौधे का कोई नामोनिशान नही आया…. वहीं आस पास के कुछ बच्चों के गमलों मे...

🌳 क्या हम पूर्ण सुखी है ?🌳

पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय उनकी सेवा उपलब्ध रहते थे।  उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी। फिर भी राजा उसके जीवन के सुखी नहीं था।  क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान रहता था।वे सदा बीमारियों से घिरे रहते थे।  राजा का उपचार सभी बड़े-बड़े वैद्यों द्वारा किया गया परंतु राजा को स्वस्थ नहीं हो सके।  समय के साथ राजा की बीमारी बढ़ती जा रही थी। अच्छे राजा की बढ़ती बीमारी से राज दरबार चिंतित हो गया।  राजा की बीमारी दूर करने के लिए दरबारियों द्वारा नगर में ऐलान करवा दिया गया कि जो भी राजा स्वास्थ्य ठीक करेगा उसे असंख्य स्वर्ण मुहरे दी जाएगी। यह सुनकर एक वृद्ध राजा का इलाज करने राजा के महल में गया।  वृद्ध ने राजा के पास आकर कहा:- ‘महाराज, आप आज्ञा दे तो आपकी बीमारी का इलाज मैं कर सकता हूं।’  राजा की आज्ञा पाकर वह बोला:- ‘आप किसी पूर्ण सुखी मनुष्य के वस्त्र पहनिए, आप अवश्य स्वस्थ और सुखी हो जाएंगे।’  वृद्ध की बात सुनकर राजा के सभी मंत्री और सेवक जोर-जोर से हंसने लगे।  इस पर वृद्ध ने कहा:- ...

समय बचत बैंक

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मैं स्विजरलैंड में एक बार पढ़ने के लिए गया। वहां पर मैंने एक किराए का मकान लिया। मेरी मकान मालकिन जिसका नाम क्रिस्टीना था। जिसकी उम्र 67 साल की थी और वह एक रिटायर स्कूल टीचर थी। उसको इतनी प्राप्त पेंशन मिलती थी जिसमें उसका खाना पीना, रहना और रोजाना की जरूरत सहज ही पूरी हो सकती थी परंतु फिर भी उसने एक काम की तलाश करी।  एक 87 साल के बूढ़े व्यक्ति को उसने उसकी सेवा करने का कार्यभार उठाया।  यहाँ पर समय बचत बैंक करके एक सोसाइटी है। जो भी यहाँ पर सेवा की जाती है वह समय बैंक में जमा हो जाता है।  इस समय को जब भी आप वापस लेना चाहे तो फिर वह वापस भी ले सकता है। जब मैंने पहली बार सुना तो मुझे बहुत अच्छा लगा कि आप दूसरों की मदद कर अपने समय को बैंक में जमा कर सकते हो और जब आप लेना चाहो उस समय को वापस भी ले सकते हो। मैंने उनसे विस्तार से समझना चाहा,  तो उन्होंने मुझे कहा कि यहां पर स्विस फेडरल मिनिस्ट्री ऑफ सोशल सिक्योरिटी के नाम से एक सोसाइटी है जो समय की बचत समय बैंक चलाती है। जिसके अंदर कोई भी अपना समय देकर समय को बैंक में सेव कर सकता है और केवल वही समय दे सकता है ज...

!!! तीन तरह के लोग !!!

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गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों  में आज काफी उत्साह था , उनकी बारह वर्षों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी और अब वो अपने घरों को लौट सकते थे।  गुरुकुल की परंपरा के अनुसार शिष्यों को आखिरी उपदेश देने की तैयारी कर रहे थे। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए सभी शिष्य एक जगह एकत्रित हो गए . गुरु जी ने अपने हाथ में कुछ लकड़ी के खिलौने पकडे हुए थे , उन्होंने शिष्यों को खिलौने दिखाते हुए कहा , ”आप को इन तीनो खिलौनों में अंतर ढूँढने हैं।” सभी शिष्य ध्यानपूर्वक खिलौनों को देखने लगे। तीनो लकड़ी से बने बिलकुल एक समान दिखने वाले गुड्डे थे। सभी चकित थे की भला इनमे क्या अंतर हो सकता है ? तभी किसी ने कहा , ” अरे , ये देखो इस गुड्डे के में एक छेद  है .” यह संकेत काफी था ,जल्द ही शिष्यों ने पता लगा लिया और गुरु जी से बोले," गुरु जी इन गुड्डों में बस इतना ही अंतर है कि – एक के दोनों कान में छेद है दूसरे के एक कान और एक मुंह में छेद है , और तीसरे के सिर्फ एक कान में छेद है  “ गुरु जी बोले , ” बिलकुल सही , और उन्होंने धातु का एक पतला तार देते हुए उसे कान के छेद में डालने के लिए कहा । ...

!! मन का विचार !!

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एक बुढिय़ा दूसरे गांव जाने के लिए अपने घर से निकली। उसके पास एक गठरी भी थी। चलते-चलते वह थक गई। थकान की वजह से उसे गठरी का बोझ भारी लगने लगा था। तभी उसने देखा कि पीछे से एक घुड़सवार चला आ रहा है। बुढिय़ा ने उसे आवाज दी। घुड़सवार पास आया और बोला, ‘‘क्या बात है अम्मा, मुझे क्यों बुलाया?’’ बुढिय़ा ने कहा, ‘‘बेटा, मुझे सामने वाले गांव जाना है। बहुत थक गई हूं। गठरी उठाई नहीं जाती। तू भी शायद उधर ही जा रहा है। यह गठरी घोड़े पर रख ले। मुझे चलने में आसानी हो जाएगी।’’ घुड़सवार ने कहा, ‘‘अम्मा, तू पैदल है। मैं घोड़े पर हूं। गांव अभी दूर है। पता नहीं तू कब तक वहां पहुंचेगी। मैं तो थोड़ी ही देर में पहुंच जाऊंगा। मुझे तो आगे जाना है। वहां क्या तेरा इंतजार करते थोड़े ही बैठा रहूंगा?’’  यह कहकर वह चल पड़ा। कुछ दूर जाने के बाद वह सोचने लगा, ‘‘मैं भी कितना मूर्ख हूं। बुढिय़ा ढंग से चल भी नहीं सकती। क्या पता उसे ठीक से दिखाई भी देता हो या नहीं। वह मुझे गठरी दे रही थी। संभव है उसमें कीमती सामान हो। मैं उसे लेकर भाग जाता तो कौन पूछता! बेकार ही मैंने उसे मना कर दिया।’’ गलती सुधारने की गरज से वह फिर बुढिय़ा ...

कुछ पल अपने लिए भी जीना सीखे

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कुछ साल पहले, मेरी एक सहेली ने सिर्फ 50 साल की उम्र पार की थी। लगभग 8 दिनों बाद वह एक बीमारी से पीड़ित हो गई थी ... और उसकी जल्दी ही  मृत्यु हो गई। ग्रुप में हमें एक शोक संदेश प्राप्त हुआ कि ... "दुख की बात है .. वह हमारे साथ नहीं रही " ...  दो महीने बाद मैंने उसके पति को फोन किया। ऐसे ही मुझे लगा कि  .. वह बहुत परेशान होगा.  क्योंकि ट्रैवल वाला जॉब था। अपनी मृत्यु तक मेरी सहेली सब कुछ देख लेती थी .. घर .. अपने बच्चों की शिक्षा ... वृद्ध ससुराल वालों की देखभाल करना .. उनकी बीमारी .. रिश्तेदारों का प्रबंधन करना .. _ सब कुछ, सब कुछ, सब कुछ _ वह कहती रहती थी .. "मेरे घर को मेरे समय की जरूरत है, .. मेरे पति चाय काफ़ी भी नहीं बना पाते, मेरे परिवार को मुझसे हर चीज के लिए जरूरत है, लेकिन कोई भी मेरे द्वारा किए गए प्रयासों की परवाह नहीं करता है और न ही मेरी सराहना करता है। सब मेरी मेहनत को नोर्मल मान के चलते हैं  "। मैंने उसके पति को यह जानने के लिए फ़ोन किया कि क्या परिवार को किसी सहारे की जरूरत है. मुझे लगा कि उनके पति बहुत परेशान होंगे  .. अचानक से सारी ज़िम्मेद...

खुशबू की कीमत

सालों पहले एक भिखारी नंदा नगरी में भूख से तड़पने के कारण खाने के लिए कुछ मांग रहा था। तभी उसे एक व्यक्ति कुछ रोटियां दे देता है। अब भिखारी रोटी के लिए सब्जी की तलाश में पास के ही एक पंडाल में पहुंचता है। वहां भिखारी रोटी के लिए पंडाल के मालिक से थोड़ी-सी सब्जी मांगता है। भिखारी को देखते ही गुस्से में पंडाल का मालिक उसे भगा देता है। दुखी भिखारी किसी तरह मालिक की नजरों से बचते हुए पंडाल की रसोई में पहुंच जाता है। वहां उसे कई तरह की लजीज सब्जियां दिखती हैं। गर्म-गर्म सब्जियों से भाप निकल रही थी। भाप को देखकर भिखारी के मन में हुआ कि अगर रोटियों को इस भाप के ऊपर रख दिया जाए, तो सब्जी की खुशबू उनमें मिल जाएगी। फिर रोटी में भी सब्जी का स्वाद आने लगेगा और सब्जी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यह सब सोचते हुए भिखारी रोटी पर सब्जी डालने की जगह, उन्हें सब्जी से निकलने वाले भाप के ऊपर रख देता है। तभी अचानक वहां पंडाल का मालिक आ जाता है और भिखारी को सब्जी चोरी करने के लिए पकड़ लेता है। भिखारी उससे कहता है कि मैंने सब्जी नहीं चुराई है। मैं सिर्फ सब्जी की खुशबू ले रहा था। मालिक भिखारी को धमकाते हुए कहता है ...

डाकिया

एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।" आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ...ठहरो।" लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ बहुत जगह जाना है..मैं ज्यादा देर इंतज़ार नहीं कर सकता....।" लड़की की फिर आवाज आई...," डाकिया चाचा , अगर आपको जल्दी है तो दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए,मैं आ रही हूँ कुछ देर औऱ लगेगा ।  " अब बूढ़े डाकिये ने झल्लाकर कहा,"नहीं,मैं खड़ा हूँ,रजिस्टर्ड चिट्ठी है,किसी का हस्ताक्षर भी चाहिये।" तकरीबन दस मिनट बाद दरवाजा खुला। डाकिया इस देरी के लिए ख़ूब झल्लाया हुआ तो था ही,अब उस लड़की पर चिल्लाने ही वाला था लेकिन, दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया औऱ उसकी आँखें खुली की खुली रह गई।उसका सारा गुस्सा पल भर में फुर्र हो गया। उसके सामने एक नन्ही सी अपाहिज कन्या जिसके एक पैर नहीं थे, खड़ी थी।  लडक़ी ने बेहद मासूमियत से डाकिये की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाया औऱ कहा...दो मेरी चिट्ठी...। डाकिया चुप...

अनजाने कर्म का फल!!!!!

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था । राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था । उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी । तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला ।  तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई । किसी को कुछ पता नहीं चला । फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी । अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ । ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ??? (1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है .... या (2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है .... या (3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी .... या (4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला .... ब...

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति का अनुभव

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जॉन डी रॉकफेलर दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति और पहले अरबपति थे। 25 साल की आयु में, वे अमेरिका में सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक के स्वामी बने और 31 साल की आयु में, वे दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनर बन गए। 38 साल की आयु तक, उन्होंने यू.एस. में 90% रिफाइंड तेल की कमान संभाली और 50 की आयु तक, वह देश के सबसे धनी व्यक्ति हो गए थे। जब उनकी मृत्यु हुई, तो वह दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति थे। एक युवा के रूप में वे अपने प्रत्येक निर्णय, दृष्टिकोण और रिश्ते को अपनी व्यक्तिगत शक्ति और धन को बढ़ाने में लगाते थे। लेकिन 53 साल की आयु में वे बीमार हो गए। उनका पूरा शरीर दर्द से भर गया और उनके सारे बाल झड़ गए, नियति को देखिए, उस पीड़ादायक अवस्था में, दुनिया का एकमात्र अरबपति जो सब कुछ खरीद सकता था, अब केवल सूप और हल्के से हल्के स्नैक्स ही पचा सकता था। उनके एक सहयोगी ने लिखा, वह न तो सो सकते थे, न मुस्कुरा सकते थे और उस समय जीवन में उसके लिए कुछ भी मायने नहीं रखता था।" उनके व्यक्तिगत और अत्यधिक कुशल चिकित्सकों ने भविष्यवाणी की कि वह एक वर्ष ही जी पाएंगे।  उनका वह वर्ष बहुत धीरे-धीरे, बहुत पीड़ा से ...

दोषारोपण

एक आदमी रेगिस्तान से गुजरते वक़्त बुदबुदा रहा था, “कितनी बेकार जगह है ये, बिलकुल भी हरियाली नहीं है…और हो भी कैसे सकती है यहाँ तो पानी का नामो-निशान भी नहीं है.” तपती रेत में वो जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा था उसका गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था. अंत में वो आसमान की तरफ देख झल्लाते हुए बोला- क्या भगवान आप यहाँ पानी क्यों नहीं देते? अगर यहाँ पानी होता तो कोई भी यहाँ पेड़-पौधे उगा सकता था, और तब ये जगह भी कितनी खूबसूरत बन जाती! ऐसा बोल कर वह आसमान की तरफ ही देखता रहा…मानो वो भगवान के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा हो! तभी एक चमत्कार होता है, नज़र झुकाते ही उसे सामने एक कुंवा नज़र आता है! वह उस इलाके में बरसों से आ-जा रहा था पर आज तक उसे वहां कोई कुँवा नहीं दिखा था… वह आश्चर्य में पड़ गया और दौड़ कर कुंवे के पास गया… कुंवा लाबा-लब पानी से भरा था.   उसने एक बार फिर आसमान की तरफ देखा  और पानी के लिए धन्यवाद करने की बजाये बोला, “पानी तो ठीक है लेकिन इसे निकालने के लिए कोई उपाय भी तो होना चाहिए.” उसका ऐसा कहना था कि उसे कुँवें के बगल में पड़ी रस्सी और बाल्टी दिख गयी. एक बार फिर उसे अपनी आँखों पर यकीन नही...

एक नर्तकी के दोहे द्वारा ज्ञान

एक राजा को राज करते काफी समय हो गया था।उसके बाल भी सफ़ेद होने लगे थे।एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया। राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दी, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे भी उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई, नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे। तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा - "घणी गई थोड़ी रही, या में पल पल जाय। एक पलक के कारणे, युं ना कलंक लगाय।" अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला।  तबले वाला सतर्क होकर तबला बजाने लगा।  जब यह दोहा गुरु जी ने सुना तो गुरुजी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दी। दोहा सुनते ही राजकुमारी ने  भी अपना नौलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया। दोहा सुनते ही राजा के युवराज ने भी अपना मुकुट उतारकर नर्तकी को समर्पित क...

सम्बन्धों में हानि लाभ नहीं देखा जाता।

विनोद हाईवे पर गाड़ी चला रहा था।  सड़क के किनारे उसे एक 12-13 साल की लड़की तरबूज बेचती दिखाई दी। विनोद ने गाड़ी रोक कर पूछा "तरबूज की क्या रेट है बेटा? " लड़की बोली " 50 रुपये का एक तरबूज है साहब।" पीछे की सीट पर बैठी विनोद की पत्नी बोली " इतना महंगा तरबूज नही लेना जी। चलो यहाँ से। "विनोद बोला "महंगा कहाँ है इसके पास जितने तरबूज है कोई भी पांच किलो के कम का नही होगा। 50 रुपये का एक दे रही है तो 10 रुपये किलो पड़ेगा हमें। बाजार से तो तू बीस रुपये किलो भी ले आती है। " विनोद की पत्नी ने कहा तुम रुको मुझे मोल भाव करने दो।” फिर वह लड़की से बोली "30 रुपये का एक देना है तो दो वरना रहने दो। " लड़की बोली " 40 रुपये का एक तरबूज तो मै खरीद कर लाती हूँ आंटी। आप 45 रुपये का एक ले लो। इससे सस्ता मै नही दे पाऊँगी।" विनोद की पत्नी बोली" झूठ मत बोलो बेटा। सही रेट लगाओ देखो ये तुम्हारा छोटा भाई है न? इसी के लिए थोड़ा सस्ता कर दो।" उसने खिड़की से झाँक रहे अपने चार वर्षीय बेटे की तरफ इशारा करते हुए कहा। सुंदर से बच्चे को देख कर लड़की एक...

काल पर विजय

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था| महाराज युधिष्ठिर राजा बन चुके थे| अपने चारों छोटे भाइयों की सहायता से वह राजकाज चला रहे थे प्रजा की भलाई के लिए पाँचों भाई मिलजुल कर जुटे रहते| जो कोई दीन-दुखी फरियाद लेकर आता, उसकी हर प्रकार से सहायता की जाती| एक दिन युद्धिष्ठिर् राजभवन में बैठे एक मंत्री से बातचीत कर रहे थे| किसी समस्या पर गहन विचार चल रहा था| तभी एक ब्राह्मण वहाँ पहुँचा| कुछ दुष्टों ने उस ब्राह्मण को सताया था| उन्होंने ब्राह्मण की गाय उससे छीन ली थी| वह ब्राह्मण महाराज युधिष्ठिर के पास फरियाद लेकर आया था| मंत्री जी के साथ बातचीत में व्यस्त होने के कारण महाराज युधिष्ठिर उस ब्राह्मण की बात नहीं सुन पाए| उन्होंने ब्राह्मण से बाहर इन्तजार करने के लिए कहा|ब्राह्मण मंत्रणा भवन के बाहर रूक कर महाराज युधिष्ठिर का इंतज़ार करने लगा| मंत्री से बातचीत समाप्त करने के बाद महाराज ने ब्राहमण को अन्दर बुलाना चाहा, लेकिन तभी वहाँ किसी अन्य देश का दूत पहुँच गया| महाराज फिर बातचीत में उलझ गए| इस तरह एक के बाद एक कई महानुभावों से महाराज युधिष्ठिर ने बातचीत की| अंत में सभी को निबटाकर जब महाराज भवन से बा...

"हृदय में भगवान्"

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यह घटना जयपुर के एक वरिष्ठ डॉक्टर की आपबीती है, जिसने उनका जीवन बदल दिया। वह हृदय रोग विशेषज्ञ  हैं। उनके अनुसार:-           एक दिन मेरे पास एक दंपत्ति अपनी छः साल की बच्ची को लेकर आए। निरीक्षण के बाद पता चला कि उसके हृदय में रक्त संचार बहुत कम हो चुका है।           मैंने अपने साथी डाक्टर से विचार करने के बाद उस दंपत्ति से कहा - 30% संभावना है बचने की ! दिल को खोलकर ओपन हार्ट सर्जरी के बाद, नहीं तो बच्ची के पास सिर्फ तीन महीने का समय है !           माता पिता भावुक हो कर बोले, "डाक्टर साहब ! इकलौती बिटिया है। ऑपरेशन के अलावा और कोई चारा ही नहीं है, आप ऑपरेशन की तैयारी कीजिये।"           सर्जरी के पांच दिन पहले बच्ची को भर्ती कर लिया गया। बच्ची मुझ से बहुत घुलमिल चुकी थी, बहुत प्यारी बातें करती थी। उसकी माँ को प्रार्थना में अटूट विश्वास था। वह सुबह शाम बच्ची को यही कहती, बेटी घबराना नहीं। भगवान बच्चों के हृदय में रहते हैं। वह तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे।         ...

देने की खुशी

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हॉलीवुड की महान अभिनेत्री कैथरीन हेपबर्न शायद अकेली ऐसी शख्स थीं, जिन्होंने चार बार ऑस्कर अवॉर्ड जीता और दर्जनों बार नामांकित हुईं। लेकिन उन्होंने कभी भी भव्य समारोह में इसे प्राप्त करने के लिए उपस्थिति नहीं दी। उनका दृढ़ विश्वास था कि उनके अभिनय और सिनेमा को पसंद करने वाले लोगों का स्नेह और प्यार ही उनके लिए सबसे बड़ा इनाम है। कैथरीन हेपबर्न मध्यम वर्गीय परिवार से थीं, जिनका पालन-पोषण साधारण तरीके से हुआ। लेकिन उनके माता-पिता ने बचपन में ही उनमें मजबूत मूल्य स्थापित किए। उन्होंने खुद एक घटना को इस तरह से बयान किया: "एक बार, जब मैं किशोरी थी, मैं और मेरे पिता सर्कस की टिकट खरीदने के लिए लाइन में खड़े थे। आखिरकार, हमारे और टिकट काउंटर के बीच केवल एक और परिवार रह गया। यह परिवार मुझ पर गहरा प्रभाव छोड़ गया। उनके साथ आठ बच्चे थे, जो शायद 12 साल से कम उम्र के थे। उनके कपड़ों से पता चलता था कि उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन उनके कपड़े साफ-सुथरे और सलीके से पहने हुए थे। बच्चे बेहद अनुशासित थे। सभी दो-दो की कतार में, अपने माता-पिता के पीछे हाथ पकड़कर खड़े थे। वे जोश और उत...

विनम्रता की जीत

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सुबह मेघनाथ से लक्ष्मण का अंतिम युद्ध होने वाला था। वह मेघनाथ जो अब तक अविजित था, जिसकी भुजाओं के बल पर रावण युद्ध कर रहा था, अप्रितम योद्धा ! जिसके पास सभी दिव्यास्त्र थे। सुबह लक्ष्मण जी,भगवान राम से आशीर्वाद लेने गए उस समय भगवान राम पूजा कर रहे थे !  पूजा समाप्ति के पश्चात प्रभु श्री राम ने हनुमानजी से पूछा:- अभी कितना समय है युद्ध होने में❓ हनुमानजी ने कहा:- प्रभु,अभी कुछ समय है! यह तो प्रातःकाल है...  भगवान राम ने लक्ष्मण जी से कहा:- यह पात्र लो और भिक्षा मांगकर लाओ,जो पहला व्यक्ति मिले उसी से कुछ अन्नं मांग लेना....  सभी बड़े आश्चर्य में पड़ गए, आशीर्वाद की जगह भिक्षा! लेकिन लक्ष्मण जी को जाना ही था। लक्ष्मण जी जब भिक्षा मांगने के लिए निकले तो उन्हें सबसे पहले रावण का एक सैनिक मिल गया! आज्ञा अनुसार मांगना ही था। यदि भगवान की आज्ञा न होती तो उस सैनिक को लक्ष्मण जी वहीं मार देते,परंतु वे उससे भिक्षा मांगते हैं...  सैनिक ने अपनी रसद से लक्ष्मण जी को कुछ अन्न दे दिए....  लक्ष्मण जी ने वह अन्न लेकर भगवान राम को अर्पित कर दिए...  तत्पश्चात भगवान र...

आधा किलो आटा

एक दिन एक सेठ जी को अपनी सम्पत्ति के मूल्य निर्धारण की इच्छा हुई। लेखाधिकारी को तुरन्त बुलवाया गया। सेठ जी ने आदेश दिया, "मेरी सम्पूर्ण सम्पत्ति का मूल्य निर्धारण कर ब्यौरा दीजिए, यह कार्य अधिकतम एक सप्ताह में हो जाना चाहिए।" ठीक एक सप्ताह बाद लेखाधिकारी ब्यौरा लेकर सेठ जी की सेवा में उपस्थित हुआ । सेठ जी ने पूछा- “कुल कितनी सम्पदा है?”   “सेठ जी, मोटे तौर पर कहूँ तो आपकी सात पीढ़ी बिना कुछ किए धरे आनन्द से भोग सके इतनी सम्पदा है आपकी।” बोला लेखाधिकारी। लेखाधिकारी के जाने के बाद सेठ जी चिंता में डूब गए, ‘तो क्या मेरी आठवी पीढ़ी भूखी मरेगी?’ वह रात दिन चिंता में रहने लगे। तनाव ग्रस्त रहते, भूख भाग चुकी थी, कुछ ही दिनों में कृशकाय हो गए। सेठानी जी द्वारा बार बार तनाव का कारण पूछने पर भी जवाब नहीं देते। सेठानी जी से सेठ जी की यह हालत देखी नहीं जा रही थी।   मन की स्थिरता व शान्त्ति का वास्ता देकर सेठानी ने सेठ जी को साधु संत के पास सत्संग में जाने को प्रेरित कर ही लिया। सेठ जी भी पँहुच गए एक सुप्रसिद्ध संत समागम में। एकांत में सेठ जी ने सन्त महात्मा से मिलकर अपनी समस्या का निदान जा...

भगवान श्रीकृष्ण ने छोटी उंगली पर ही क्यों गोवर्धन पर्वत उठाया ?

वैसे तो सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को इन्द्र के अहंकार को तोड़ने के लिए अपनी उंगली उठा लिया था। अब दूसरी तरह से भी इसका सार समझते हैं।जब भगवान श्रीकृष्ण गोकुलवासियों को इन्द्रदेव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठानेवाले थे तो उन्होंने अपनी उंगलियों से पूछा कि वे किस पर पर्वत को उठाएं।सबसे पहले अंगूठा बोला, ‘‘मैं नर हूँ। बाकी उंगलियाँ तो स्त्रियाँ हैं। अत: आप पर्वत मुझ पर ही उठाएँ।" फिर तर्जनी बोली, ‘‘किसी को यदि चुप कराना हो या कोई संकेत करना होता है तो मैं ही काम आती हूँ, इसलिए आप केवल मुझ पर ही पर्वत उठाएँ।"इसके बाद मध्यमा बोली, ‘‘सबसे बड़ी होने के साथ-साथ शक्ति भी रखती हूँ। अत: आप पर्वत मेरे ऊपर ही उठाएँ।’’ फिर अनामिका बोली, ‘‘सभी पवित्र कार्य मेरे द्वारा ही सम्पन्न होते हैं, मन्दिरों में देवी-देवताओं को मैं ही तिलक लगाती हूँ। अत: आप मुझ पर ही पर्वत उठाएँ।"अब भगवान ने सबसे छोटी उंगली कनिष्ठा की ओर देखा तो उसके नेत्र बरबस ही भर आये। वह भरे नेत्रों के साथ बोली, ‘‘भगवान, एक तो मैं सबसे छोटी हूँ, मुझमें कोई गुण भी नहीं है। मेरा कहीं उपयोग भ...

!! दूसरों के पीछे मत भागो !!

एक बार स्वामी विवेकानंद जी अपने आश्रम में एक छोटे पालतू कुत्ते के साथ टहल रहे थे। तभी अचानक एक युवक उनके आश्रम में आया और उनके पैरों में झुक गया और कहने लगा– “स्वामीजी मैं अपनी जिंदगी से बड़ा परेशान हूं। मैं प्रतिदिन पुरुषार्थ करता हूं लेकिन आज तक मैं सफलता प्राप्त नहीं कर पाया। पता नहीं ईश्वर ने मेरे भाग्य में क्या लिखा है, जो इतना पढ़ा-लिखा होने के बावजूद भी मैं नाकामयाब हूं।” युवक की परेशानी को स्वामीजी ने तुरंत समझ लिया। उन्होंने युवक से कहा– “भाई! थोड़ा मेरे इस कुत्ते को कहीं दूर तक सैर करा दो। उसके बाद मैं तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर दूंगा।” उनकी इस बात पर युवक को थोड़ा अजीब लगा लेकिन दोबारा उसने कोई प्रश्न नहीं किया और कुत्ते को दौड़ाते हुए आगे निकल पड़ा। कुत्ते को सैर कराने के बाद, जब एक युवक आश्रम में पहुंचा तो वह देखा कि युवक का चेहरा तेज है लेकिन उसका छोटा कुत्ता थक से जोर-जोर से हांफ रहा था। स्वामीजी ने पूछा, “भाई, मेरा कुत्ता इतना कैसे थक गया? तुम तो बड़े शांत दिख रहे हो। क्या तुम्हें थकावट नहीं हुई?” युवक ने कहा, “स्वामीजी, मैं धीरे-धीरे आराम से चल रहा था, लेकिन मेरा कुत्त...

!! किसान और लोमड़ी !!

एक बार एक किसान जंगल में लकड़ी बिनने गया तो उसने एक अद्भुत बात देखी। एक लोमड़ी के दो पैर नहीं थे, फिर भी वह खुशी खुशी घसीट कर चल रही थी। यह कैसे ज़िंदा रहती है जबकि किसी शिकार को भी नहीं पकड़ सकती, किसान ने सोचा। तभी उसने देखा कि एक शेर अपने दांतो में एक शिकार दबाए उसी तरफ आ रहा है। सभी जानवर भागने लगे, वह किसान भी पेड़़ पर चढ़ गया। उसने देखा कि शेर, उस लोमड़ी के पास आया। उसे खाने की जगह, प्यार से शिकार का थोड़ा हिस्सा डालकर चला गया। दूसरे दिन भी उसने देखा कि शेर बड़े प्यार से लोमड़ी को खाना देकर चला गया। किसान ने इस अद्भुत लीला के लिए भगवान का मन में नमन किया। उसे अहसास हो गया कि भगवान जिसे पैदा करते हैं उसकी रोटी का भी इंतजाम कर देते हैं। यह जानकर वह भी एक निर्जन स्थान में चला गया और वहां पर चुपचाप बैठ कर भोजन का रास्ता देखता। कई दिन गुज़र गए, कोई नहीं आया। वह मरणासन्न होकर वापस लौटने लगा। तभी उसे एक विद्वान महात्मा मिले। उन्होंने उसे भोजन पानी कराया, तो वह किसान उनके चरणों में गिरकर वह लोमड़ी की बात बताते हुए बोला, महाराज, भगवान ने उस अपंग लोमड़ी पर दया दिखाई पर मैं तो मरते मरते बचा; ऐसा क्यों ह...

विनम्रता

एक बार नदी ने समुद्र से अहंकार से कहा, "बताओ पानी के प्रचंड वेग से मैं तुम्हारे लिए  क्या बहा कर लाऊं ? तुम चाहो तो मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु, मानव आदि सभी को जड़ से उखाड़ कर ला सकती हूं।" समुद्र समझ गया कि नदी को अहंकार आ गया है। उसने कहा, "यदि मेरे लिए कुछ लाना ही चाहती हो तो थोड़ी सी घास उखाड़ कर ले आना ।" समुद्र की बात सुनकर नदी हंसी और कहा," बस! इतनी सी बात ! अभी आपकी सेवा में हाजिर कर देती हूं। नदी ने अपने पानी का प्रचंड प्रवाह घास उखाड़ने के लिए लगाया परंतु घास नहीं उखड़ी। नदी ने हार नहीं मानी, और बार-बार प्रयास किया, पर घास बार-बार पानी के वेग के सामने झुक जाती, और उखड़ने से बच जाती। नदी को सफलता नहीं मिली । थकी हारी निराश नदी समुद्र के पास पहुंची और अपना सिर झुका कर कहने लगी, "मैं मकान, वृक्ष, पहाड़, पशु, मनुष्य आदि बहाकर ला सकती हूं, परंतु घास उखाड़ कर नहीं ला सकी क्योंकि जब भी मैंने प्रचंड वेग से खास पर प्रहार किया तो घास ने झुककर अपने आप को बचा लिया, और मैं ऊपर से खाली हाथ निकल आई।" नदी की बात सुनकर समुद्र ने मुस्कुराते हुए कहा,"जो क...