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Showing posts from January, 2020

*💐आत्मसम्मान*💐

उस दिन ट्रेन लेट होकर रात्रि 12 बजे पहुँची। बाहर एक वृद्ध रिक्शावाला ही दिखा जिसे कई यात्री जान बूझकर छोड़ गए थे। एक बार मेरे मन में भी आया, इससे चलना पाप होगा,फिर मजबूरी में उसी को बुलाया, वह भी बिना कुछ पूछे चल दिया। कुछ दूर चलने के बाद ओवरब्रिज की चढ़ाई थी, तब जाकर पता चला, उसका एक ही हाथ था। मैंने सहानुभूतिवश पूछा, ‘‘एक हाथ से रिक्शा चलाने में बहुत ही परेशानी होती होगी?’’ ‘‘बिल्कुल नहीं बाबूजी, शुरू में कुछ दिन हुई थी।’’ रात के सन्नाटे में वह एक ही हाथ से रिक्शा खींचते हुए पसीने– पसीने हो रहा था । मैंने पूछा, ‘एक हाथ की क्या कहानी है?’’ थोड़ी देर की चुप्पी के बाद वह बोला, ‘‘गाँव में खेत के बँटवारे में रंजिश हो गई, वे लोग दबंग और अपराधी स्वभाव के थे, मुकदमा उठाने के लिए दबाव डालने लगे।’’ वह कुछ गम्भीर हो गया और आगे की बात बताने से कतराने लगा, किन्तु मेरी उत्सुकता के आगे वह विवश हो गया और बताया, ‘‘एक रात जब मैं खलिहान में सो रहा था, जान मारने की नीयत से मुझ पर वार किया गया। संयोग से वह गड़ासा गर्दन पर गिरने के बजाए हाथ पर गिरा और वह कट गया।’’ ‘‘क्या दिन की मजदूरी से काम नहीं चलता ज...

खिड़की*

एक बार की बात है , एक नौविवाहित जोड़ा किसी किराए के घर में रहने पहुंचा . अगली सुबह , जब वे नाश्ता कर रहे थे , तभी पत्नी ने खिड़की से देखा कि सामने वाली छत पर कुछ कपड़े फैले हैं , – “ लगता है इन लोगों को कपड़े साफ़ करना भी नहीं आता …ज़रा देखो तो कितने मैले लग रहे हैं ? “ पति ने उसकी बात सुनी पर अधिक ध्यान नहीं दिया . एक -दो दिन बाद फिर उसी जगह कुछ कपड़े फैले थे . पत्नी ने उन्हें देखते ही अपनी बात दोहरा दी ….” कब सीखेंगे ये लोग की कपड़े कैसे साफ़ करते हैं …!!” पति सुनता रहा पर इस बार भी उसने कुछ नहीं कहा . पर अब तो ये आये दिन की बात हो गयी , जब भी पत्नी कपडे फैले देखती भला -बुरा कहना शुरू हो जाती . लगभग एक महीने बाद वे यूँहीं बैठ कर नाश्ता कर रहे थे . पत्नी ने हमेशा की तरह नजरें उठायीं और सामने वाली छत की तरफ देखा , ” अरे वाह , लगता है इन्हें अकल आ ही गयी …आज तो कपडे बिलकुल साफ़ दिख रहे हैं , ज़रूर किसी ने टोका होगा !” पति बोल , ” नहीं उन्हें किसी ने नहीं टोका .” ” तुम्हे कैसे पता ?” , पत्नी ने आश्चर्य से पूछा . ” आज मैं सुबह जल्दी उठ गया था और मैंने इस खिड़की पर लगे कांच को...

एक कुम्हार

* मैंने सुना है, एक कुम्हार को रास्ते पर चलते समय..बाजार से लौटता था अपनी मटकियां बेच कर, अपने गधे को लेकर..एक हीरा पड़ा मिल गया। बड़ा हीरा! उठा लिया सोच कर कि चमकदार पत्थर है, बच्चे खेलेंगे। फिर राह में ख्याल आया उसे कि बच्चे कहीं गंवा देंगे, यहां-वहां खो देंगे, अच्छा हो गधे के गले में लटका दूं। गधे के लिए आभूषण हो जाएगा। कुम्हार के हाथ हीरा पड़े तो गधे के गले में लटकेगा ही, और जाएगा कहां! उसने गधे के गले में हीरा लटका दिया। एक जौहरी अपने घोड़े पर सवार आता था। देख कर चैंक गया। बहुत हीरे उसने देखे थे, पर ऐसा हीरा नहीं देखा था। और गधे के गले में लटका! रोक लिया घोड़ा। समझ गया कि इस मूढ़ को कुछ पता नहीं है। इसलिए नहीं कहा कि इस हीरे का कितना दाम; कहा कि इस पत्थर का क्या लेगा? कुम्हार ने बहुत सोचा-विचारा, बहुत हिम्मत करके कहा कि आठ आने दे दें। जौहरी तो बिल्कुल समझ गया कि इसे कुछ भी पता नहीं है। आठ आने में करोड़ों का हीरा बेच रहा है! मगर जौहरी को भी कंजूसी पकड़ी। उसने सोचा: चार आने लेगा? चार आने में देगा? आठ आने, शर्म नहीं आती इस पत्थर के मांगते। कुम्हार ने कहा कि फिर रहने दो। फिर गधे के गले मे...

1 बहु ऐसी भी

👩‍👩‍👧‍👦👩‍👩‍👧‍👦👩‍👩‍👧‍👦👩‍👩‍👧‍👦👩‍👩‍👧‍👦👩‍👩‍👧‍👦 *1 बहु ऐसी भी* 👩🏻‍🦰👩🏻‍🦰👩🏻‍🦰👩🏻‍🦰👩🏻‍🦰 "चलो निकलो मेरे घर से" शिवानी की सास अपने बेटे पर चिल्ला रही थी क्योंकि वो आज गरीब घर की बेटी शिवानी से कोर्ट मैरिज जो करके आया था, बिना दहेज के| सास के बड़े अरमान थे कि बेटे को पढाया लिखाया है तो उसकी कीमत भी वसूल की जाए, लेकिन उनकी ये इच्छा मन में ही रह गई| शिवानी का पति आशीष अपनी माँ को समझा भी रहा था और माफी भी मांग रहा था, लेकिन उसकी माँ तो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थी| आशीष अपनी पत्नी शिवानी को लेकर बाहर निकल गया| आशीष के दो भाई और एक बहन भी थी| सबकी उम्र में दो-दो साल का फर्क था, सब ही शादी के लायक थे| आशीष ने घर से जाने के बाद बहुत बार माँ को फोन किए, लेकिन न ढंग से बात की और न ही घर आने को कहा| फिर भी आशीष ने कहा "माँ मेरे घर के दरवाजे आपके लिए सदा खुले हैं| माँ के उपकार मैं कभी नहीं भूलूंगा, जब आपका दिल चाहे आ सकती हो"| आशीष की माँ ने दहेज के लालच में दोनो बेटों की शादियाँ बहुत अमीर घरों में की और बहुएँ इतनी नखरीली और आराम परस्...